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21 August 2016

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य :-----
सम्राट चन्द्रगुप्त महान थे। उन्हें चन्द्रगुप्त महान कहा जाता है।
सिकंदर के काल में हुए चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के सेनापति सेल्युकस
को दो बार बंधक बनाकर छोड़ दिया था। सम्राट चन्द्रगुप्त
मौर्य के गुरु चाणक्य थे। चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्युकस की पुत्री
हेलन से विवाह किया था। चन्द्रगुप्त की एक भारतीय पत्नी
दुर्धरा थी जिससे बिंदुसार का जन्म हुआ।
चन्द्रगुप्त ने अपने पुत्र बिंदुसार को गद्दी सौंप दी थीं। बिंदुसार
के समय में चाणक्य उनके प्रधानमंत्री थे। इतिहास में बिंदुसार को
'पिता का पुत्र और पुत्र का पिता' कहा जाता है, क्योंकि वे
चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र और राजा अशोक महान के पिता थे।
चाणक्य और पौरस की सहायता से चन्द्रगुप्त मौर्य मगध के
सिंहासन पर बैठे और चन्द्रगुप्त ने यूनानियों के अधिकार से
पंजाब को मुक्त करा लिया। चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन-प्रबंध
बड़ा व्यवस्थित था। इसका परिचय यूनानी राजदूत मेगस्थनीज
के विवरण और कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' से मिलता है।
चन्द्रगुप्त महान के प्रारंभिक जीवन के बारे में जानकारी हमें जैन
और बौद्ध ग्रंथों से प्राप्त होती है। विशाखदत्त के नाटक
'मुद्राराक्षस' में चन्द्रगुप्त को नंदपुत्र न कहकर मौर्यपुत्र कहा
गया है। चन्द्रगुप्त मुरा नाम की भील महिला के पुत्र थे। यह
महिला धनानंद के राज्य में नर्तकी थी जिससे राजाज्ञा से
राज्य छोड़कर जाने का आदेश दिया गया था और वह महिला
जंगल में रहकर जैसे-तैसे अपने दिन गुजार रही थी।
चन्द्रगुप्त मौर्य के काल में भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र था।
16 महाजनपदों में बंटे भारत में उसका जनपद सबसे शक्तिशाली
था। चन्द्रगुप्त से पूर्व मगध पर क्रूर धनानंद का शासन था, जो
बिम्बिसार और अजातशत्रु का वंशज था।

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