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21 August 2016

राजा युधिष्ठिर


                  राजा युधिष्ठिर :--------

पांडव पुत्र युधिष्ठिर को धर्मराज भी कहते थे। इनका जन्म
धर्मराज के संयोग से कुंती के गर्भ द्वारा हुआ था। महाभारत
युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने ही भारत पर राज किया था। 2964 ई.
पूर्व युधिष्ठिर का राज्यारोहण हुआ था।
युधिष्ठिर भाला चलाने में निपुण थे। वे कभी मिथ्या नहीं
बोलते थे। उनके पिता ने यक्ष बनकर सरोवर पर उनकी 


         परीक्षा भी ली थी। महाभारत युद्ध में धर्मराज युधिष्ठिर साथ अक्षौहिणी सेना के 
            स्वामी होकर कौरवों के साथ युद्ध करने को तैयार हुए थे, जबकि परम क्रोधी दुर्योधन ग्यारह

अक्षौहिणी सेना का स्वामी था।
महाभारत युद्ध के बाद युधिष्ठिर को राज्य, धन, वैभव से वैराग्य
हो गया था। वे वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करना चाहते थे किंतु
समस्त भाइयों तथा द्रौपदी ने उन्हें तरह-तरह से समझाकर
                        क्षात्रधर्म का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उनके शासनकाल में संपूर्ण                              भारतीय उपमहाद्वीप पर शांति और खुशहाली रही।
युधिष्ठिर सहित पांचों पांडव अर्जुन पुत्र अभिमन्यु के पुत्र
महापराक्रमी परीक्षित को राज्य देकर महाप्रयाण हेतु
उत्तराखंड की ओर चले गए और वहां जाकर पुण्यलोक को प्राप्त हुए। परीक्षित के बाद उनके पुत्र जन्मेजय ने राज्य संभाला। महाभारत में जन्मेजय के छः और भाई बताए गए हैं। ये भाई हैं कक्षसेन, उग्रसेन, चित्रसेन, इन्द्रसेन, सुषेण तथा नख्यसेन।

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